top of page
Search

किसान दिवस पर विशेष.........23 दिसंबर

  • Writer: PUSHKAR SINGH
    PUSHKAR SINGH
  • Dec 20, 2019
  • 4 min read

Updated: Dec 21, 2019

आधुनिक भारत और किसान

अध्याय:-5- पूछे इंडिया आपसे???

शायद बहुत लोग भूल गए हैं कि आधुनिक भारत में किसान भी है ।पर उनकी सुनने वाला कोई नही। भारत संरचनात्मक दृष्ट से गाॅवो का देश है, और सभी ग्रामीण समुदायों के लोग मुख्तः कृषि कार्य से जुड़े हैं। भारत को भारत कृषि प्रधान देश की संज्ञा भी मिली हुई है। लगभग 70% भारतीय लोग किसान हैं। वे भारत देश के रिढ़ की हड्डी के समान है।किसान हमारे राष्ट्र के जीवन रक्त है। भारत 60 %लगभग लोगों के कृषि पर प्रत्यक्ष या पपरोक्ष रूप से निर्भर है।भारतीय किसान पूरे दिन और रात काम करते है। वह बीज बोते है और रात में फसलों पर नजर भी रखते है।

किसानों की हालत।

भारतीय किसान गरीब है। उनकी गरीबी पूरी दुनिया में प्रसिद् हैं छोटे भूमि धारकों और सीमांत किसानों की हालत अब भी संतोषजनक से भी कम है।

पुराने किसानों अधिकांश अनपढ़ थे। पढी-लिखी नहीं थी लेकिन नई पीढ़ी के अधिकतर किसान शिक्षित हैं। उनके शिक्षित होने के नाते उन्हें बहुत मदद मिलती है। वे प्रयोगशाला में अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण करवा लेते है। इस प्रकार, वे समझ जाते की उनके क्षेत्रों में सबसे ज्यादा फसल किसकी होगी।फिर भी कुछ नहीं होता।भूखा पेट पहले खाने की व्यवस्था करता है। भविष्य के लिए बीमा कहां से करवाएगा। सरकार ही तो बीमा प्रचार-प्रसार करवाती है। किसानों की स्थिति बद से बदतर है। किसान के बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे, अन्य जगह खर्च कहां से होगा। सरकार को चाहिए कि वो इस ओर ध्यान दे।

नाबार्ड के हालिया अध्ययन के मुताबिक भारत में 10.07 करोड़ किसानों में से 52.5 प्रतिशत क़र्ज़ में दबे हुए हैं. वर्ष 2017 में एक किसान परिवार की कुल मासिक आय 8,931 रुपये थी.जब राज्यों की स्थिति पर नजर डाली जाती है तो हमें किसानों की आय में गंभीर असमानता नजर आती है. नाबार्ड के रिपोर्ट के मुताबिक देश में किसानों की सबसे कम मासिक आय मध्य प्रदेश (7,919 रुपये), बिहार (7,175 रुपये), आंध्र प्रदेश (6,920 रुपये), झारखंड (6,991 रुपये), ओडिशा (7,731 रुपये), त्रिपुरा (7,592 रुपये), उत्तर प्रदेश (6,668 रुपये) और पश्चिम बंगाल (7,756 रुपये) है. जबकि तुलनात्मक रूप से किसानों की ऊंची औसत मासिक आय पंजाब (23,133 रुपये), हरियाणा (18,496 रुपये) में दर्ज की गई.

समस्या क्या है?

भारत सरकार के कृषि लागत और मूल्य आयोग ने अपनी विभिन्न रिपोर्टों में किसान की आय दो गुनी करने के लिए 8 बातें कही हैं. आयोग अपनी सिफारिशों में कहता है कि किसान की आय को बढ़ाने के लिए उत्पादकता बढ़ानी है, खेती की लागत घटानी है, किसान की उपज को अच्छी और लाभदायक कीमत दिलवाना है, सिंचाई और सघनता बढ़ानी है, बेहतर नियोजन करना है, किसानों की क्षमता बढ़ानी है, किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना है और आखिर में लोगों को खेती से निकाल कर गैर-कृषि काम में लगाना है.यानी भारत में इस आयोग की आखिरी सिफारिश को ही लागू किया जा रहा है, शेष तो नीति सौंदर्य के बिंदु भर हैं. छः सालों में किसान की मासिक आय में खेती, उत्पादन और पशुधन से होने वाली आय का हिस्सा अनुपातिक रूप से बहुत कम हुआ है. समस्या है।

1)अच्छे बीज

अच्छी फसल के लिए अच्छे बीजों का होना बेहद जरूरी है। लेकिन सही वितरण तंत्र ना होने के चलते छोटे किसानों को लाभ नहीं मिलता और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

2)सिंचाई व्यवस्था

भारत में मॉनसून की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इसके बावजूद देश के तमाम हिस्सों में सिंचाई व्यवस्था की उन्नत तकनीकों का प्रसार नहीं हो सका है।

3)पूंजी की कमी

इस क्षेत्र में पूंजी की कमी बनी हुई है। छोटे किसान महाजनों, व्यापारियों से ऊंची दरों पर कर्ज लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में किसानों ने बैंकों से भी कर्ज लेना शुरू किया है। लेकिन हालात बहुत नहीं बदले है।

4)मिट्टी का कटाव

दरअसल उपजाऊ जमीन के बड़े इलाकों पर हवा और पानी के चलते मिट्टी का कटाव होता है। मिट्टी अपनी मूल क्षमता को खो देती है और इसका असर फसल पर पड़ता है।

5)मशीनीकरण का अभाव

ऐसे मामले छोटे और सीमांत किसानों के साथ अधिक देखने को मिलते हैं। इसका असर भी कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और लागत पर साफ नजर आता है।

6)भंडारण सुविधाओं का अभाव

भारत के ग्रामीण इलाकों में अच्छे भंडारण की सुविधाओं की कमी है। ऐसे में किसानों पर जल्द से जल्द फसल का सौदा करने का दबाव होता है जिसके कारण किसान औने-पौने दामों में फसल का सौदा कर लेते हैं। भंडारण सुविधाओं को लेकर न्यायालय ने भी कई बार केंद्र और राज्य सरकारों को फटकार भी लगाई है और जमीनी हालात तो आप जानते है।

7)परिवहन भी एक बाधा

भारतीय कृषि की तरक्की में एक बड़ी बाधा अच्छी परिवहन व्यवस्था की कमी भी है। आज कृषि क्षेत्र को इस समस्या से उबारने के लिए बड़ी धनराशि और मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता भी चाहिए।

अब आते आरोप प्रत्यारोप पर।

भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने लोकसभा में आठ जुलाई, 2014 को पूछे गये प्रश्न क्र. 81 के जवाब में भारत के पूर्व कृषिमंत्री और वर्तमान में सांसद पूर्वी चंपारण ने किसानों के आत्महत्या के कारणों में "प्रेम प्रकरण" और "नपुंसकता" को एक कारण बताने में शर्म महसूस नहीं की। यह नीतिनिर्धारकों का संवेदना शून्य और किसान विरोधी होने का स्पष्ट प्रमाण है।वही दूसरी तरफ

अपने 2016 के बजट भाषण में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का वादा किया था।भारत के कृषि संकट में बहुत बड़ी समस्या है।कर्जमाफी केवल एक हिस्सा है।आर्थिक मानकों पर देश के 10 करोड़ किसान परिवार बहुत ही असुरक्षित हैं।

अब आखिर में।

वादे। है।वादों ।का ।क्या। वो बड़ा आदमी है..धनतेरस मना रहा है। साहब हम कैसे मनाएं धनतेरस, हमारा धन तो पानी में तैर रहा है.... तन के कपड़े फट जाते है, तब जा के फसल लहलाती है। और लोग कहते है किसान के, जिस्म से पसीने की बदबू आती है।

।।।।जय हिन्द जय भारत।।।🇮🇳

🇮🇳🙏🤝🇮🇳📝

आपका अज्ञानी

पुष्कर सिंह

VISIT PROFILE

THANKS

 
 
 

Comments


Post: Blog2_Post
bottom of page