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"मोतिहारी" "चीनी मिल" और "आत्महत्या"

  • Writer: PUSHKAR SINGH
    PUSHKAR SINGH
  • Dec 13, 2019
  • 7 min read

"मोतिहारी" "चीनी मिल" और "आत्महत्या"

📌अध्याय-2 पूछें इंडिया आपसे??

मोतिहारी.........

बिहार का एक जिला जो पूर्वी चंपारण के नाम से भी जाना जाता है!

मोतिहारी पहले बेतिया राज का क्षेत्र था।बेेतिया राज भारत में तीसरी सबसे बड़ी ज़मींदारी संपत्ति थी। गंगाश्वर देव जयहरी ब्राह्मण के रूप में जाना जाता था, जो अब भूमिहार ब्राह्मणों का एक संप्रदाय है। 1765 में, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने दीवानी बेतिया राज का अधिग्रहण किया उसके अधिकार क्षेत्र में सबसे बड़ा क्षेत्र था। चंपारण जिला 1866 में बनाया गया था।महाराजा हरेंद्र किशोर सिंह के समय में!

1915 में जब गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, उत्तरी भारत में किसानों को इंडिगो प्लांटर्स द्वारा उत्पीड़ित देखा। क्षेत्र के एक किसान राज कुमार शुक्ल ने मोहनदास करमचंद गांधी को अपनी दुर्दशा से अवगत कराया और मदद करने के लिए आमंत्रित किया। इस प्रकार, महात्मा गांधी ने मोतिहारी आने का फैसला किया।

चंपारण सत्याग्रह शुरू होने वाला पहला लोकप्रिय सत्याग्रह था।जो 19 अप्रैल 1917 सुरु हुआ| बहुत सारी चीज़ें है जिले के बारे में। पर अब हम बात करते हैं आजादी के बाद की बात !

1951-52 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद पहला लोकसभा चुनाव था। जो 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक आयोजित हुआ! और चंपारण के पहले सांसद के रूप में विभूति मिश्रा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से चुने गए! इन्होंने 1952 से 1971 तक यानी 4 बार चंपारण का नेतृत्व किया।

2 नवंबर1972 में चंपारण दो जिलों में बट गया पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण।

उसके बाद #1977: ठाकुर रमापति सिंह, जनता पार्टी,#1980: कमला मिश्रा मधुकर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,#1984: प्रभाती गुप्ता, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,#1989: राधामोहन सिंह, भारतीय जनता पार्टी,#1991: कमला मिश्रा मधुकर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,#1996: राधा मोहन सिंह, भारतीय जनता पार्टी,#1998: रमा देवी, भारतीय जनता पार्टी,#1999: राधा मोहन सिंह, भारतीय जनता पार्टी,#2004: अखिलेश प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय जनता दल #2009:राधा मोहन सिंह, भाजपा #2014:राधा मोहन सिंह, भाजपा #2019:राधा मोहन सिंह, भाजपा।

"किसी ने कहा है। चाहो तो तुम भी हाल पूछ सकते हो हमारा"

जो राजनीती कर रहे है वो भूल गए हैं कि जनता भी कोई चीज या आप कहो वस्तु है!जो मौजूद है इस भारत में। चुनाव का टाइम आते सारे नेता अपनी उपलब्धि गिनाते हैै,और जनसंपर्क करने लगते है। पर उस से पहले अपने चापलुसो से घिरे रहते है! "भईया यही तो राजनीति है।

पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,187,264 है. इनमें से 640,901 पुरुष वोटर और 546,363 महिला वोटर हैं.जिले में 2011 की जनगणना के अनुसार 50,82,868 की आबादी वाले 1344 गाँवों के साथ 3968.0 वर्ग किमी का क्षेत्र शामिल है। ये बिहार का दूसरा सबसे बड़ा जिला पटना के बाद जनसंख्या की दृष्टि से है। या लगभग संयुक्त अरब अमीरात के बराबर है! ये बाते हो गई मोतिहारी के बारे में।

चीनी मिल के बारे में

चीनी मिल 195 बीघा, 18 कठा की भूमि के एक भूखंड पर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के जिला मुख्यालय मोतिहारी में स्थित है। यह स्थल मोतिहारी रेलवे स्टेशन से 3 किमी दूर है,चीनी मिल को रेलवे साइडिंग और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 से जुड़ा है जो आने वाले कच्चे माल, चीनी उत्पाद - क्रिस्टल चीनी और बाईप्रोडक्ट-गुड़ के परिवहन के लिए बहुत सुविधाजनक है

श्री हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, (SHSIL) को वर्ष 1932 में चीनी के विनिर्माण की मुख्य वस्तु के साथ शामिल किया गया था। पहली इकाई की स्थापना 1936 में मोतिहारी, बिहार में की गई थी, जिसकी शुरुआती क्षमता 250 TCDथी (Tons of Cane per Day )।1967-68 में क्षमता बढ़ाकर 1500 TCD कर दी गई और वर्तमान में क्षमता 2500 टीसीडी है ।

कंपनी की स्थापना स्वर्गीय रावतमुल्लजी नोपनी / स्वर्गीय रामेश्वरलालजी नोपनी द्वारा की गई थी। वे राष्ट्रीयकरण से पहले यूनाइटेड कमर्शियल बैंक और रूबी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के निदेशक थे। वह इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन, बिहार शुगर मिल्स एसोसिएशन, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स कलकत्ता आदि के अध्यक्ष भी थे। कंपनी की बागडोर उनके पुत्र स्वर्गीय मोहनलालजी नोपनी को सौंप दी गई थी और उसके बाद वर्ष 1991 में उनके पुत्र श्री बी.के. गोपाणी को सौंप दी गई।

यह कारखाना वर्ष 1969 में गोबिंद शुगर मिल्स लिमिटेड को पट्टे पर दिया गया था। और पट्टा 1995 में समाप्त हो गया था। इसके बाद, कारखाने को वर्ष 1995 में ईस्टर्न शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को पट्टे पर दिया गया था। वे कारखाने को प्रभावी ढंग से नहीं चला सकते थे, इसलिए 2005 में पट्टे को समाप्त कर दिया गया और कारखाने को वापस ले लिया गया।

अबबात समस्या कि क्यों नहीं चालू हुआ चीनी मिल???

‌आप को जैसा मैंने बताया कि ये मिल कोई काम नहीं कर रही 2002 से! कोई काम का मतलब है की बंद पड़ी है। इस हलचल भरे शहर से। एक बात जो स्थानीय लोग खुलकर व्यक्त करते हैं, वह है स्थानीय सत्ताधारी पार्टी के नेताओं, भू-माफिया और सरकारी अधिकारियों सहित शक्तिशाली लोगों के 'सांठगांठ' के खिलाफ उनका गुस्सा, जो उन्हें हड़पने में अधिक रुचि रखते हैं अब बंद मोतिहारी शुगर मिल की 'महंगी' भूमि ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं करने दिया।

शक्तिशाली लोगों के एक समूह ने पहले ही अपने नाम पर जमीन खरीदने में कामयाबी हासिल कर ली है।मोतिहारी विधानसभा सीट (1985 से 2000 तक) में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के पूर्व विधायक त्रिवेणी तिवारी और (congress) के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह ने आरोप लगाया। कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी अपने पिता के नाम से एक मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए तैयारी कर रहे हैं। मिल की उसी भूमि पर अपने दिवंगत पिता के नाम पहले से ही एक ट्रस्ट बनाया हुआ था। जिसमें अधिकांश सदस्य सत्ताधारी दल के थे। हालांकि, अब तक प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की स्थापना नहीं हुई है। राधा मोहन सिंह, जो संसद में मोतिहारी का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार भी भाजपा के हैं।

इसके पुनरुद्धार के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है। मिल बंद होने के समय मिल में लगभग 600 श्रमिक कार्यरत थे। और हजारों किसान अपना गन्ना बेचने के लिए इस पर निर्भर थे। लगभग 14 साल पहले, जब 2005 में नीतीश कुमार को पहली बार सत्ता में आने के लिए वोट दिया गया था। तब उन्होंने आश्वासन दिया था। राज्य में मोतिहारी सहित सभी बंद चीनी मिलों को फिर से खोला जाएगा।

लेकिन सत्ता में तीन कार्यकालों के बाद भी।उनका वादा कागज पर बना हुआ है। यहां तक तो सब ठीक है।

मोदी जी आए पर चीनी मिल ना लाए।।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 6 साल पहले मोतिहारी के लोगों से किया गया अपना वादा भूल गए है। अगली यात्रा के दौरान, वह इस मिल की चीनी के साथ चाय की चुस्की लेंगे। ऐसा बोला था। हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने मोतिहारी की जनता को ,और नेताओं की तरफ बेवकूफ बनाया। उसके बाद मोतिहारी सत्याग्रह शताब्दी मनाने मोतिहारी आए थे। पर चीनी मिल नहीं आया।

अब मुद्दे पर आते है

हनुमान चीनी मिल या बोले तो मोतिहारी चीनी मिल के मजदूरो को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी?

10 अप्रैल 2017 को बिहार के पूर्वी चंपारन जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल के दो मजदूरों ने सैलरी और किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर आत्मदाह कर लिया था. ये दिन चंपारण के इतिहास का काला अध्याय है सूरज बैठा और नरेश श्रीवास्तव वर्ष 2002 से बंद पड़ी श्री हनुमान चीनी मिल के श्रमिकों के यूनियन में शीर्ष पदों पर थे. सूरज बैठा ज्वाइंट सेक्रेटरी और नरेश श्रीवास्तव जनरल सेक्रेटरी थे.वर्ष 2002 से ही चीनी मिल के मजदूरों को तनख्वाह नहीं मिल रही थी. दोनों चूंकि यूनियन में बड़े ओहदे पर थे, इसलिए मजदूर पेमेंट के लिए उन पर लगातार दबाव बना रहे थे. लेकिन, चीनी मिल प्रबंधन पैसे दे नहीं रहा था। दोनों काफी दिनों तक सत्याग्रह पर थे। लेकिन, कहीं से कोई आश्वासन नहीं मिल रहा था.

मजदूरों की तनख्वाह के भुगतान की मांग व भुगतान नहीं होने पर आत्मदाह करने को लेकर उन्होंने राष्ट्रपति से लेकर जिला प्रशासन व स्थानीय छतौनी थाने तक को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन कोई पहलकदमी नहीं हुई.सूरज बैठा व नरेश श्रीवास्तव ने मजबूर होकर 10 अप्रैल को मिल के सामने आत्मदाह कर लिया था. उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल ले जा गया था, जहां इलाज के क्रम में उनकी मौत हो गई थी. 50 वर्षीय सूरज बैठा की पत्नी माया देवी कहती हैं, ‘उन्होंने 700 रुपये माहवार पर चीनी मिल में नौकरी शुरू की थी और मिल बंद होने तक 15 हजार रुपये पाते थे. मिल प्रबंधन पर उनका 133 महीने का करीब 22 लाख रुपये बकाया था.

अबआरोप-प्रत्यारोप की बाते.............

आदरणीय प्रधानमंत्री जी

"क्या आप भूल गए है प्रधानमंत्री बनने के बाद किसानों को! जो वादे किए थे 2014 में कि अगली बार आऊगा तो मोतिहारी की चीनी मिल के बने चीनी का चाय पिगए"

जितना पैसा आपने चंपारण सत्याग्रह शताब्दी मनाने में लगा दिया उतने पैसे से आप एक चीनी मिल का पुनरुद्धार करते । यह होती सच्ची श्रद्धांजलि महात्मा गांधी को राजकुमार शुक्ला जी को।

‌ मोतिहारी के बुजुर्ग कहते हैं की ये सब आप लोगों की महिमा जिसके कारण आज मोतिहारी की जनता को इतना त्रस्त होना पड़ रहा है।जहां तक वहां के आम आदमी की बात है वो अपने को लाचार,मजबूर और शोषित समझ रहा है।

‌ मोतिहारी भारतीय इतिहास में एक अपना गौरवान्वित स्थान रखता है आज हम मोतिहारी को सत्याग्रह, जॉर्ज ऑरवेल और राजकुमार शुक्ला के नाम से जानते है।

‌ क्या उस महात्मा की भूमि और मोतिहारी की जनता को भी आपने अपने ब्रांडिंग के लिए उपयोग किया।

‌हमारी बदकिस्मती समझ ले या हमारी बेकूफी हमने आप का साथ नहीं छोड़ा।

‌ हमारे सांसद महोदय आदरणीय राधा मोहन सिंह जी (पूर्व कृषि मंत्री भारत सरकार और वर्तमान में मोतिहारी सांसद) को मोतिहारी की जनता ने 6 बार जीत दिला। पर हमारे सांसद महोदय ने क्या किया जनता के लिए। "आप से अच्छा कौन जानता है"

‌ मोतिहारी के पूर्व सांसद और वर्तमान में मुज्जफरपुर से राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने आरोप लगाया था कि जो चिनी मिल की जमीन है उसे भी हमारे सांसद महोदय ने बेच दिया।

‌महोदय आप क्या करेंगे हमे नहीं पता पर अब ये पता चल गया। आप भी देश के लिए जुम्मले वाली सरकार की तरह है।.......

अब आखिर में

""सोच अच्छी होनी चाहिए क्योंकि नजर का इलाज मुमकिन है पर लालच का इलाज मुमकिन नहीं"""""""अब बात हर उस भारतीय की जो इस लालची सिस्टम के आगे नतमस्तक होकर अपने जिन्दगी को अपने हाल पर छोड़ दिया है.............

🎶🎶कुछ ऐसा कर कमाल की मै तेरा हो जाऊ।🎶🎶

🇮🇳🙏🤝🇮🇳📝

आपकाअज्ञानी

पुष्कर सिंह

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